- धन विधेयक की परिभाषा संविधान के अनुच्छेद 110 के तहत दी गयी है।
2. धन विधेयक को पारित करने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 109 में उल्लिखित है।
3. धन विधेयक को किसी भी परिस्थिति में राज्यसभा में पेश नहीं किया जा सकता है। इसे केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है। ध्यान रहे वित्त विधेयक भी केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है।
4. धन विधेयक को लोकसभा में पेश किये जाने से पूर्व राष्ट्रपति की सहमति आवश्यक है। वित्त विधेयक के मामले में भी राष्ट्रपति की पूर्व सहमति या सिफारिश आवश्यक है।
5. लोकसभा में पारित हो जाने के बाद धन विधेयक को राज्यसभा में भेजा जाता है। ग़ौरतलब है कि धन विधेयक पर राज्यसभा सिर्फ अपनी सिफारिश दे सकती है। यानि उस पर विचार विमर्श करने के बाद अपनी सिफारिशों सहित या रहित लोकसभा को धन विधेयक वापस भेजना होता है।
6. धन विधेयक को राज्यसभा में भेजने से पूर्व लोकसभा का अध्यक्ष यह प्रमाणित करता है कि उक्त विधेयक धन विधेयक है।
7. राज्यसभा को धन विधेयक में किसी भी प्रकार के संशोधन का कोई अधिकार नहीं है। लेकिन वह संशोधन की सिफारिश कर सकती है।
8. राज्यसभा धन विधेयक को नामंजूर नहीं कर सकती।
9. राज्यसभा को 14 दिनों के भीतर धन विधेयक को अपनी सिफारिशों सहित या बिना सिफारिशों के लोकसभा को वापस भेजना होता है।
10. यदि राज्यसभा 14 दिनों के भीतर धन विधेयक को लोकसभा में वापस नहीं करती है तो 14 दिनों की अवधि की समाप्ति के बाद, धन विधेयक को दोनों सदनों द्वारा पारित समझा जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि राज्यसभा धन विधेयक को अधिकतम 14 दिनों तक अपने पास रख सकती है।
11. लोकसभा धन विधेयक पर राज्यसभा द्वारा दिए गए (यदि कोई हो तो) सिफारिशों को मानने के लिए बाध्य नहीं है। वह राज्यसभा के सिफारिशों को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है। इसका विधेयक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है और विधेयक दोनों ही दशाओं में पारित समझा जाता है।
12. दोनों सदनों द्वारा पारित होने के बाद धन विधेयक को राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाता है।
13. राष्ट्रपति धन विधेयक पर अपनी अनुमति दे सकता है या अनुमति को रोक सकता (वीटो शक्ति का प्रयोग) है। इस सन्दर्भ में राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की सलाह से कार्य करता है।
14. चूंकि धन विधेयक राष्ट्रपति की सिफारिश से ही पेश किया जाता है अतः इस बात की सम्भावना कम है कि मंत्रिमंडल राष्ट्रपति को विधेयक पर अपनी अनुमति ना देने या रोक लेने की सलाह देगा।
15. ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति धन विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस नहीं भेज सकता है क्योंकि उसकी पूर्व अनुमति से ही धन विधेयक को लोक सभा में पेश किया जाता है।
16. धन विधेयक के सम्बन्ध में संयुक्त अधिवेशन का कोई प्रावधान नहीं है।
17. धन विधेयक केवल सरकार या मंत्रियों द्वारा ही प्रस्तावित किया जा सकता है।
18. यदि यह प्रश्न उठता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं तो उस पर लोकसभा के अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है।
19. लोकसभा अध्यक्ष को किसी भी धन विधेयक को दो बार प्रमाणित करना पड़ता है कि वह धन विधेयक है। पहली बार जब धन विधेयक को राज्यसभा को भेजा जाता है तो और दूसरी बार जब उसे राष्ट्रपति को अनुमति के लिए भेजा जाता है।
20. साधारणतया लोकसभा अध्यक्ष द्वारा किसी विधेयक को धन विधेयक का प्रमाण पत्र दिए जाने को किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती, किन्तु यदि अध्यक्ष का कार्य तर्कसंगत नहीं है या किसी भी मनुष्य की बुद्धि से स्वीकार्य नहीं हो सकता तो उसे शक्ति के आभासी प्रयोग के आधार पर चुनौती दी जा सकती है।
21. धन विधेयक के मामले में लोकसभा को राज्यसभा अधिक अधिकार प्राप्त है। इस सम्बन्ध में राज्यसभा के अधिकार अत्यंत सीमित हैं।

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