दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और इस पर आधारित पांच प्रश्नों के उत्तर दें। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक अंग्रेजों द्वारा बंदी बनाए गए थे। उन्होंने जेल में अपने आप को अध्ययन में व्यस्त रखा। जेल बहुत शांत जगह थी जहां पक्षी भी नहीं चहचहाते थे। तिलक ने अपने भोजन में से थोड़ा खाना पक्षियों के लिए रखना शुरू कर दिया। आरम्भ में तो किसी ने वह खाना छुआ नहीं , किन्तु कुछ दिन बाद थोड़े से पक्षियों ने वहां आना शुरु कर दिया। धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ती गयी और वे तिलक के चारों ओर इकट्ठे होने लग गए। पक्षी उनके सिर और कंधों पर निडर हो बैठ जाते थे। उनकी चहचहाहट से वातावरण में मधुर संगीत भर गया। एक दिन गश्त लगाते हुए जेलर तिलक की कोठरी की ओर आए। पक्षियों की चहचहाहट सुन कर उन्होंने कोठरी में झांका और पूर्णतः आश्चर्यचकित रह गए। इतने सारे पक्षी! ये कहां से आ गए? उसने तिलक से पूछा। तिलक ने उत्तर दिया। मित्र मैं इन्हें भारत से नहीं लाया। ये यहाँ से ही आये हैं। जेलर आश्चर्यचकित रह गए। उसने कहा यहाँ तो हर कोई पक्षियों को खा जाता है। इसलिए पक्षी इस ओर नहीं आते हैं। तिलक हंसकर बोले, पक्षी भी मित्र और शत्रु में फर्क कर सकते हैं।
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तिलक जेल में अपना समय कैसे व्यतीत करते थे?
तिलक अपने भोजन में से पक्षियों के लिए कुछ खाना क्यों रखते थे?
धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ती गयी। यहाँ ‘उनकी’ शब्द किनके लिए प्रयुक्त हुआ है?
पक्षी तिलक के कन्धों और सिर पर बैठते थे, क्योंकि
पक्षी जेल की ओर नहीं जाते थे, क्योंकि
