दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और इनपर आधारित पांच प्रश्नों के उत्तर दें। प्राचीन भारत में चिकित्सा विज्ञान बहुत ही उन्नत अवस्था में था। इस काल में विकसित चिकित्सा विज्ञान की स्वदेशी व्यवस्था आयुर्वेद है। आयुर्वेद शब्द का शाब्दिक अर्थ है – अच्छा स्वास्थ्य और लंबी आयु। औषधि की यह प्राचीन भारतीय व्यवस्था न केवल बीमारियों को ठीक करती थी बल्कि यह बीमारियों का कारण और लक्षण मालूम करने में भी मदद करती थी। यानि यह स्वस्थ और बीमार दोनों की ही मार्गदर्शिका है। आयुर्वेद में जड़ीबूटियों का प्रयोग औषधि के रुप में किया जाता है। प्रकृति में मिलने वाली इन जड़ीबूटियों से बीमारी का इलाज करते हुए उसके जड़ पर प्रहार करके बीमारी के कारणों को हमेशा के लिए दूर किया जाता है। आयुर्वेद का प्रमुख उद्देश्य स्वास्थ्य और लंबी आयु है। साथ ही आयुर्वेद का पृथ्वी का प्राचीनतम चिकित्सा शास्त्र भी कहा गया है। चरक को आयुर्वेदिक औषधि का जनक माना गया है। इनके अलावे सुश्रुत, माधव और जीवक भी प्राचीनकाल के प्रसिद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सक थे। समय के साथ-साथ आयुर्वेद ने पश्चिमी देशों में अपनी पहचान बना ली है। वर्तमान में भारत में योगगुरु बाबा रामदेव का नाम उल्लेखनीय है।
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आयुर्वेदिक औषधि का जनक किसे कहा जाता है?
मार्गदर्शिका का अर्थ क्या है?
निम्नलिखित में से कौन प्राचीनकाल के आयुर्वेदिक चिकित्सक नहीं थे?
आयुर्वेद ने हाल ही में किन देशों में अपनी जगह बना ली है?
