सती प्रथा पर प्रतिबन्ध –
1. राजा राम मोहन राय के अथक प्रयासों का प्रभाव।
2. 1829 (17वें) के अधिनियम द्वारा प्रतिबंध।
3. सती के प्रयास को हत्या के बराबर अपराध घोषित किया गया.
4. इस प्रथा को प्रोत्साहित करने वालों के खिलाफ फौजदारी मुक़दमा चलने की घोषणा की गयी.
5. 1829 में बंगाल तथा 1830 में मद्रास एवं बम्बई में लागु।
6. तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड विलियम बेंटिक की महत्वपूर्ण भूमिका।
शिशु हत्या –
1. मुख्यतया बंगालियों और राजपूतों में प्रचलित।
2. मुख्य रूप से शिशु बालिकाओं की हत्या का प्रचलन।
3. गवर्नर जनरल जॉन शोर के काल में 1795 के 21वें अधिनियम द्वारा शिशु हत्या अपराध घोषित।
4. गवर्नर जनरल लार्ड वेलेजली के काल में 1804 के तीसरे अधिनियम द्वारा शिशु हत्या अपराध घोषित।
5. शिशु हत्या को साधारण हत्या के बराबर अपराध घोषित किया गया.
बाल विवाह –
1. केशवचंद्र सेन के प्रयासों से लार्ड नॉर्थब्रुक के काल में 1872 में नेटिव मैरिज एक्ट पास किया गया.
2. इसके तहत 14 वर्ष से कम आयु की लड़कियों के विवाह पर प्रतिबन्ध।
3. बी. एम. मालाबारी के प्रयासों से लार्ड लैंसडाउन के काल में 1891 में सम्मति आयु अधिनियम लागु।
4. इसके तहत 12 वर्ष से कम आयु की लड़कियों के विवाह पर प्रतिबन्ध।
5. हर विलास शारदा के प्रयासों से लार्ड इरविन के काल में 1930 में शारदा अधिनियम पारित हुआ.
6. इसके तहत 18 वर्ष से कम उम्र के लड़कों और 14 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के विवाह को अवैध घोषित।
विधवा पुनर्विवाह –
1. ईश्वरचंद्र विद्यासागर के प्रयासों से लार्ड कैनिंग के काल में 1856 में ”विधवा पुनर्विवाह अधिनियम” पारित
2. इसके तहत विधवा विवाह और उससे उत्त्पन्न बच्चे वैध घोषित किये गए
3. विष्णु शास्त्री पंडित द्वारा महाराष्ट्र में 1850 में ”विधवा पुनर्विवाह एसोसिएशन” की स्थापना की
4. करसोनदास मुलजी द्वारा 1852 में गुजरात में सत्य प्रकाश की स्थापना करके इस दिशा में सराहनीय कार्य किया
5.बम्बई में फर्ग्युसन कॉलेज के प्रो. डी. के. कर्वे ने विधुर होने पर 1893 में स्वयं विधवा से विवाह किया
6. वे विधवा पुर्नविवाह एसोसिएशन के सचिव भी रहे
7. 1899 में कर्वे ने पुणे में एक विधवा आश्रम की स्थापना की
8. भारत में पहला क़ानूनी विधवा पुनर्विवाह कलकत्ता में 7 दिसंबर 1856 को संपन्न हुआ
9. इनके अलावा महाराष्ट्र में जगन्नाथ सेठ, मद्रास में वीरेशलिंगम पंतुलु के साथ साथ बी. एम. मालाबारी, महादेव गोविन्द रानाडे आदि ने सराहनीय कार्य किये।
स्त्री शिक्षा –
1. इस दिशा में सबसे पहला प्रयास ईसाई मिशनरियों द्वारा 1819 में ”कलकत्ता तरुण स्त्री सभा” की स्थापना से किया
2. 1849 में कलकत्ता एजुकेशन कौंसिल के अध्यक्ष जे. ई. डी. बेथुन द्वारा बेथुन स्कूल की स्थापना की गयी।
3. बेथुन का प्रयास इस दिशा में पहली सशक्त पहल थी।
4. स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में ईश्वरचंद विद्यासागर की देन महान है. वे बंगाल के 35 बालिका विद्यालयों से सम्बद्ध थे.
5. 1854 के चार्ल्सवुड डिस्पैच में स्त्री शिक्षा पर बल दिया गया.
6. 1916 में डी के कर्वे द्वारा बम्बई में भारतीय महिला विश्वविद्यालय की स्थापना मील का पत्थर साबित हुआ.
7. 1918 के बाद महिलाएं उग्रविरोध प्रदर्शनों में भाग लेने लगीं।
8. 1925 में सरोजिनी नायडू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं।
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