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लोकसभा के विघटन का लम्बित विधेयकों पर प्रभाव

लोकसभा के विघटन का लंबित विधेयकों पर पड़ने वाले प्रभाव की चर्चा संविधान के अनुच्छेद 107 में की गयी है। 2. लोकसभा के विघटित हो जाने से लोकसभा में लंबित सभी विधेयक समाप्त हो जाते हैं, चाहे वह लोकसभा में पेश किया गया हो या राज्यसभा द्वारा भेजा गया हो। 3. राज्यसभा में...

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स्थगन, सत्रावसान और लोकसभा के विघटन से सम्बंधित परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

सदन का स्थगन - सदन के स्थगित होने का तात्पर्य सदन के किसी बैठक के कार्य का निलंबन है। लोकसभा या राज्यसभा का स्थगन उसके पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष या सभापति) द्वारा किया जाता है। सदन का स्थगन (कार्य निलंबन) कुछ मिनट, घंटे दिन या सप्ताह के लिए हो सकता है। यदि सदन को...

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धन विधेयक और वित्त विधेयक में 10 महत्वपूर्ण अंतर

धन विधेयक को पारित करने की प्रक्रिया अनुच्छेद 109 में दी गयी है जबकि वित्त विधेयक से सम्बंधित प्रक्रिया अनुच्छेद 117 में है। 2. धन विधेयक में केवल अनुच्छेद 110 में दिए गए विषय शामिल होते हैं जबकि वित्त विधेयक में अनुच्छेद 110 के विषयों के साथ-साथ साधारण विधान के अन्य...

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संसदीय विशेषाधिकार से सम्बंधित परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

संविधान का अनुच्छेद 105 संसद तथा उसके सदस्यों के विशेषाधिकार के बारे में प्रावधान करता है। 2. संसद सदस्यों को, संसद के अधिवेशन के दौरान या अधिवेशन के 40 दिन पूर्व या पश्चात किसी सिविल मामले में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। 3. संसद सदस्यों को गिरफ़्तारी से यह छूट...

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वित्त विधेयक से सम्बंधित परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

वित्त विधेयक के बारे में चर्चा संविधान के अनुच्छेद 117 में की गयी है। 2. वित्त विधेयक धन विधेयक से कुछ मामलों में समान है तो कुछ मामलों में भिन्न। 3. वित्त विधेयक ऐसे विधेयक को कहा जाता है, जिसमें धन विधेयक से सम्बंधित विषयों के साथ साथ साधारण विधान से सम्बंधित कुछ...

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संसद की विधायी प्रक्रिया से सम्बंधित 12 परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण अनुच्छेद

अनुच्छेद 107 - विधेयकों को प्रस्तुत किये जाने और पारित किये जाने के सम्बन्ध में प्रावधान। 2. अनुच्छेद 108 - कुछ दशाओं में संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान। 3. अनुच्छेद 109 - धन विधेयक की प्रक्रिया के सम्बन्ध में प्रावधान। 4. अनुच्छेद 110 - धन विधेयक की...

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धन विधेयक और सामान्य विधेयक में 10 महत्वपूर्ण अंतर

धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है राज्यसभा में नहीं, किन्तु सामान्य विधेयक को संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। 2. धन विधेयक को प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति पूर्व अनुमति आवश्यक होती है, किन्तु सामान्य विधेयक को पेश करने के लिए...

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निर्वाचन

1. भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त की पदावधि क्या है? UPPCS 2012 a. पांच वर्ष b. राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त c. 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक जो भी पहले हो d. पांच वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो 2. नवयुवकों द्वारा 18 वर्ष की आयु पर मताधिकार का पहली बार प्रयोग...

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विश्व के प्रमुख सागर

1. टर्की किनके मध्य स्थित है?I.A.S. (Pre) 2014 a. काला सागर और कैस्पियन सागर b. काला सागर और भूमध्य सागर c. स्वेज की खाड़ी और भूमध्य सागर d. अक़ाबा की खाड़ी और मृत सागर 2. टर्की के उत्तर में है-M.P.P.C.S. (Pre) 1991 a. काला सागर b. कैस्पियन सागर c. लाल सागर d. भूमध्य...

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मूल अधिकार: परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (भाग 1)

भारतीय संविधान के भाग 3, अनुच्छेद 12 से 35 में मूल अधिकारों की चर्चा है. भारतीय संविधान के भाग 3 में मूल अधिकारों की जितनी व्यापक चर्चा की गयी है उतनी विश्व के किसी भी अन्य संविधान में नहीं की गयी है. संविधान द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों की यह व्यवस्था अमेरिका के...

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नीति निदेशक तत्व: महत्वपूर्ण परीक्षोपयोगी तथ्य

संविधान के भाग 4, अनुच्छेद 36 से 51 में नीति निदेशक तत्वों की चर्चा है. संविधान का यह भाग आयरलैंड के संविधान से लिया गया है. गौर करने वाली बात है कि भारत और आयरलैंड के अलावा विश्व के किसी भी देश में नीति निदेशक तत्वों का प्रावधान नहीं है. नीति निदेशक तत्वों को संविधान...

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मूल कर्तव्य

मूल संविधान में मूल कर्तव्यों के बारे में कोई प्रावधान नहीं था. इसे संविधान में स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर 42वें संविधान संशोधन, 1976 द्वारा जोड़ा गया. मूल कर्तव्यों का उल्लेख संविधान के भाग 4-क के अनुच्छेद 51-क में है.42वें संविधान संशोधन द्वारा 10 मूल...

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राज्यसभा का गठन, शक्तियां एवं कार्य

राज्यसभा केंद्रीय विधायिका यानि संसद का उच्च सदन है. इसे लोकसभा की तुलना में कम शक्तियां प्राप्त होने के बावजूद भी इसकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है. राज्यसभा का संगठन संविधान के अनुच्छेद 80 में राज्यसभा के गठन की चर्चा है. राज्यसभा में सदस्यों की संख्या अधिकतम 250 हो...

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लोकसभा की शक्तियां और कार्य

लोकसभा जनता का वास्तविक प्रतिनिधित्व करता है. इसलिए इसे लोकप्रिय सदन भी कहते हैं. यह राज्यसभा से अधिक शक्तिशाली सदन है. लोकसभा राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, संविधान संशोधन आदि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इसकी शक्तियां और कार्यों को निम्नलिखित बिंदुओं में...

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लोकसभा

भारत में द्विसदनीय संघीय विधायिका की व्यवस्था है. यह व्यवस्था 1935 के भारत शासन अधिनियम में ही की गयी थी. संघीय विधायिका यानि संसद लोकसभा, राज्यसभा और देश के संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति से मिलकर बनती है. लोकसभा को निम्न सदन या लोकप्रिय सदन भी कहते हैं तथा इसके सदस्य...

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आपात उपबंधों में संशोधन

संविधान के भाग 18, अनुच्छेद 352 - 358 में संशोधन मूलतः 38वें (1975), 42वें (1976) और 44वें (1978) संविधान संशोधन द्वारा किया गया है. 38वां संविधान संशोधन (1975) राष्ट्रपति को भिन्न भिन्न आधारों पर भिन्न भिन्न उद्घोषणा करने का अधिकार दिया गया है. 42वां संविधान संशोधन...

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राष्ट्रीय आपात से सम्बंधित अनुच्छेद 358 और 359 में प्रमुख अंतर

अनुच्छेद 358 का प्रभाव सिर्फ अनुच्छेद 19 के तहत प्रदत्त मूल अधिकार के निलंबन पर पड़ता है किन्तु अनुच्छेद 359 का प्रभाव सभी मूल अधिकारों (अनुच्छेद 19, 20 और 21 को छोड़कर) के निलंबन पर पद सकता है. अनुच्छेद 358 के तहत अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार स्वतः ही निलंबित...

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राष्ट्रीय आपात तथा राष्ट्रपति शासन: प्रमुख अंतर

राष्ट्रीय आपात की चर्चा अनुच्छेद 352 में की गयी है जबकि राष्ट्रपति शासन की चर्चा अनुच्छेद 356 में की गयी है.राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर की जाती है जबकि राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा राज्य में संवैधानिक तंत्र के विफल होने...

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राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति: प्रमुख अंतर

राष्ट्रपति पद के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष जबकि उपराष्ट्रपति के लिए न्यूनतम आयु 35 वर्ष है.राष्ट्रपति पद के लिए लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की जबकि उपराष्ट्रपति पद के लिए राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता होनी चाहिए।राष्ट्रपति का पद रिक्त होने पर...

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भारत के महान्यायवादी

संविधान के भाग 5, अनुच्छेद 76 में महान्यायवादी के पद से सम्बंधित प्रावधान है. यानि महान्यायवादी का पद संवैधानिक पद है.इसकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर किया जाता है. महान्यायवादी राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यन्त पद धारण करता है.राष्ट्रपति...

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भारत का उपराष्ट्रपति

अनुच्छेद 63 के अनुसार, भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा। वह अपनी पदावधि के दौरान किसी लाभ के पद को ग्रहण नहीं कर सकता। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति भी होता है. भारत में उपराष्ट्रपति के पद सम्बन्धी प्रावधान अमेरिका के संविधान से लिया गया है. जबकि राष्ट्रपति पद...

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राष्ट्रपति की उन्मुक्तियाँ, विशेषाधिकार, वैवेकीय शक्तियां

उन्मुक्तियाँ एवं विशेषाधिकार अनुच्छेद 361 के तहत राष्ट्रपति और राज्यपाल को कुछ उन्मुक्तियाँ और विशेषाधिकार प्राप्त है. इनके बारे में आगे के बिंदुओं में चर्चा की गयी है. इन्हें अपने पदीय कर्तव्यों के सन्दर्भ में किये गए कार्य के लिए किसी न्यायालय में उत्तरदायी नहीं...

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भारत के राष्ट्रपति: परीक्षोपयोगी 30 महत्वपूर्ण तथ्य

डॉ राजेंद्र प्रसाद - जनवरी, 1950 से मई 1962 डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन - मई 1962 से मई 1967 डॉ जाकिर हुसैन - मई 1967 से मई 1969 वी वी गिरी (कार्यवाहक) - मई 1969 से जुलाई 1969 न्यायमूर्ति एम हिदायतुल्ला (कार्यवाहक) - जुलाई 1969 से अगस्त 1969 वी वी गिरी - अगस्त 1969 से...

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राष्ट्रपति की शक्तियां

भारत के संवैधानिक प्रमुख को संविधान द्वारा व्यापक शक्तियां और अधिकार दिए गए हैं. संविधान द्वारा राष्ट्रपति को दी गयी शक्तियों को शान्तिकालीन और आपातकालीन शक्तियों में बांटा जा सकता है. पुनः शान्तिकालीन शक्तियों को अध्ययन की सुविधा के लिए कार्यपालिकीय शक्तियों, विधायी...

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भारत का राष्ट्रपति

राष्ट्रपति संघीय कार्यपालिका का प्रधान होता है. वह संघ का संवैधानिक प्रधान होता है, वास्तविक प्रधान प्रधानमंत्री होता है. संघ की सभी कार्यपालिकीय शक्तियां राष्ट्रपति में निहित होती हैं. इन शक्तियों का प्रयोग वह संविधान के अनुसार, स्वयं या अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों के...

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निर्वाचन से संबंधित परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

भारत एक लोकतांत्रिक देश है. निष्पक्ष और स्वतंत्र निर्वाचन लोकतंत्र का आधार स्तम्भ है. भारत में लोकसभा तथा विधानसभाओं का निर्वाचन व्यस्क मताधिकार के आधार पर होता है. भारत का कोई भी नागरिक जो कम से कम 18 वर्ष का हो और अनिवास, चित्तविकृति, अपराध या भ्र्ष्ट आचरण के आधार...

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भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त

सुकुमार सेन - 21 मार्च, 1950 - 19 दिसंबर 1958के. वी. के. सुन्दरम - 19 दिसंबर 1958 - 30 सितम्बर 1967एस. पी. सेन वर्मा - 01 अक्टुबर 1967 - 30 सितम्बर 1972डॉ. नागेन्द्र सिंह - 01 अक्टूबर 1972 - 06 फ़रवरी 1973टी. स्वामीनाथन - 07 फ़रवरी 1973 - 17 जून 1977एस. एल. शकधर - 18...

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अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा आंग्ल भारतीय संबंधी प्रावधान

उद्देशिका में नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित कराने का संकल्प व्यक्त किया गया है. इसे सुनिश्चित कराने सम्बंधित उपबन्ध, भाग 16, अनुच्छेद 330 - 342 में दिया गया है. इसके तहत SC, ST, OBC तथा आंग्ल भारतीय समुदाय के लोगों के बारे में विशेष प्रावधान...

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राजभाषा से जुड़े परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

स्वतंत्रता के बाद हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया. किन्तु अहिन्दी भाषी लोगों ने इसका विरोध किया। फलस्वरुप राजभाषा के प्रश्न पर संविधान सभा की नियम समिति ने विचार किया और हिंदी के प्रयोग को देखते हुए हिंदी को राजभाषा बनाने के पक्ष में अपना निर्णय दिया। मुंशी-आयंगर...

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संविधान संशोधन से जुडी 25 महत्वपूर्ण तथ्य

संविधान का भाग 20, अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन की प्रक्रिया और शक्ति से सम्बंधित है. संविधान संशोधन की प्रक्रिया दक्षिण अफ्रीका के संविधान से ली गयी है. भारत में संविधान संशोधन की शक्ति सिर्फ केंद्रीय विधायिका यानि संसद को दी गयी है. संसद संविधान के किसी भी भाग में,...

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आपात से सम्बंधित 50 परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

संविधान का भाग 18, अनुच्छेद 352 से 360 तक आपात उपबंधों के बारे में है। 2. संविधान का आपात उपबंध जर्मनी के संविधान से लिया गया है। 3. आपातकाल के समय भारतीय संघ संघात्मक से एकात्मक में रूपांतरित हो जाता है। 4. संविधान में 3 तरह के आपात का प्रावधान है। अनुच्छेद 352,...

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नागरिकता: परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

भारत की नागरिकता दो तरीके से प्राप्त की जा सकती है. (1) संविधान द्वारा प्रदत्त प्रावधानों के तहत (2) संसद द्वारा बनायी गयी विधि के द्वारा (भारतीय नागरिकता अधिनियम 1995) संविधान में नागरिकता सम्बन्धी प्रावधान : -  भाग 2, अनुच्छेद 5 - 11  अनुच्छेद...

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जम्मू कश्मीर: विशेष अस्थायी उपबंध :परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

जम्मू कश्मीर: विशेष अस्थायी उपबंध :परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

भारतीय संविधान के भाग 21, अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू - कश्मीर राज्य के सम्बन्ध में कुछ विशेष किन्तु अस्थायी उपबंध किया गया है. भारतीय स्वतंत्रता  के प्रावधानों के अनुसार, जम्मू कश्मीर के महाराजा हरिसिंह ने निर्णय किया कि जम्मू कश्मीर ना तो पाकिस्तान...

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