दिए गए अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़ें और दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें। और वह बीस साल का हो गया। कबीर ने महसूस किया कि उसके जीवन में आया हुआ परिवर्तन कुछ आश्चर्यजनक आयामों का परिणाम है। उसे याद आयी, अपनी मां की वो बात, जब वह कक्षा 6 में था। अल्हड, मनमौजी कबीर की शांत मगर समझदार मां ने उससे कहा था कि, ” बेटा भले ही तुम आधा घण्टा कोई काम करो, मगर पुरे मन से करो। गया वक़्त वापस नहीं आता।” उस समय कबीर मां की बात को एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकल देता था। कक्षा 10 में पहुंचा ही था कि मां अचानक गुज़र गयी। कबीर के जीवन में सिर्फ अन्धकार बचा था। कई दिन गुजरे, जब भूखों मरने की नौबत आ गयी। फिर कबीर को मां की वो बात याद आयी ”आधा घण्टा काम वो भी पुरे मन से”। यही वो क्षण था जब कबीर ने अपने व्यक्तित्व के प्राकृतिक गुण को अपने जीवन का आधार बनाया। कबीर की आर्ट बहुत अच्छी थी किन्तु उसके पास कोई साधन नहीं था। पर उसने हिम्मत नहीं हारी। शहर के चौराहों को उसने अपना कार्यस्थल बनाया। सड़क पर मिट्टी फैलाकर उसपर तरह तरह की कलाकृतियां बना-बनाकर दिखाने लगा। शुरू में लोगों ने उसकी बनाई कलाकृतियों की तरफ ध्यान नहीं दिया लेकिन एक सप्ताह के बाद लोग उसकी कलाकृतियों को बड़े चाव से देखने लगे। उसे प्रोत्साहित करने के लिए लोग उसे पैसे भी देने लगे। समय बीता और कबीर ने अपनी स्नातक तक की पढाई पूरी की और उसकी मिट्टी से जुडी कला इतनी निखर गयी कि लोग उसे अलग-अलग शहरों में बुलाने लगे। मां का एक सुनहरा वाक्य कबीर का सूत्र बन गया। अब वह रोज गरीब बच्चों को आधा घण्टा पढ़ाता और इस तरह उसने अपनी मां को श्रद्धांजलि दी।