भाषा परीक्षण (अभ्यास प्रश्नावली)
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अनुच्छेद 9 (अपठित गद्यांश)

दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और इस पर आधारित पांच प्रश्नों के उत्तर दें। मिथिला चित्रकला जिसे मधुबनी लोककला भी कहते हैं, बिहार प्रदेश के मिथिला क्षेत्र की पारम्परिक कला है। इस चित्रकारी को गांव की महिलाएं सब्जी के रंगों से तथा मिट्टी के रंगों से बनाती हैं। ये चित्र सामान्यतया गोबर से पुते कागजों , कपड़ों, मूर्तियों तथा दीवारों पर बनाए जाते हैं। इनमें प्रायः सीता वनवास, राम और लक्ष्मण के वनवास के 12 वर्षों के संघर्ष की कहानियों या लक्ष्मी, गणेश, हनुमान आदि की मूर्तियों पर हिन्दू मिथकों को विषयवस्तु के रुप में शामिल किया जाता है। इनके साथ-साथ दैवी विभूतियों जैसे सूर्य और चन्द्रमा के भी चित्र बनाए जाते हैं। इन चित्रों में तुलसी के पौधे को विशेष स्थान मिलता है। मधुबनी साहिली के चित्र बहुत ही वैचारिक होते हैं। चित्रों में कोई बनावटीपन नहीं होता है। प्रायः ये चित्र पर्व, त्यौहार या किसी विशेष अनुष्ठानों के अवसर पर महिलाओं द्वारा बनाए जाते हैं। विषयवस्तु और रंगों के प्रयोग में ये चित्र भिन्न-भिन्न होते हैं। प्रयुक्त रंगों से यह स्पष्ट हो जाता है कि यह चित्र समाज के उच्च वर्ग से सम्बंधित है या निम्न वर्ग से। उच्च वर्ग द्वारा बनाए गए चित्र अधिक रंग-बिरंगे होते हैं जभी निम्न वर्ग के चित्रों में लाल और काली रेखाओं का प्रयोग किया जाता है। ये कला माताओं द्वारा बड़ी ही कुशलता से अपनी बेटियों को स्थानांतरित किया जाता है। वर्तमान में स्थानीयों महिलाओं के लिए मधुबनी कला एक अच्छी आय का स्त्रोत सिद्ध हो रहा है।